गुड़ी पड़वा


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गुड़ी पड़वा 2021 की तारीख व मुहूर्त

आइए जानते हैं कि 2021 में गुड़ी पड़वा कब है और गुड़ी पड़वा 2021 की तारीख और मुहूर्त। गुड़ी पड़वा का त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र में हिंदू नव वर्ष की शुरुआत या नए साल की शुरुआत के लिए मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, नया साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है और इस दिन इस त्योहार को मनाने का रिवाज है।

गुड़ी पड़वा का मुहूर्त

  1. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में, जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा होती है, उसी दिन से नव संवत्सर प्रारंभ होता है।
  2. अगर प्रतिपदा दो दिन सूर्योदय के समय पड़ रही है, तो पहले दिन गुड़ी पड़वा मनाई जाती है।
  3. यदि सूर्योदय के समय किसी भी दिन प्रतिपदा नहीं होती है, तो उस दिन नया साल तब मनाया जाता है जब प्रतिपदा शुरू होती है और समाप्त होती है।

अधिक मास होने की स्थिति में निम्नलिखित नियम के अनुसार गुड़ी पड़वा मनाते हैं–

हर 32 महीनों, 16 दिनों और 8 घंटो के पश्चात्, साल में अधिक मास जोड़ा जाता है। अधिक मास होने के बावजूद प्रतिपदा के दिन नव संवत्सर शुरू होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिक मास को मुख्य महीने का हिस्सा माना जाता है। इसलिए, मुख्य चैत्र के अलावा, अधिक मास को भी नव संवत्सर का अंग माना जाता है।

गुडी पडवा की पूजा-विधि

निम्न विधि को सिर्फ़ मुख्य चैत्र में ही किए जाने का विधान है–

  • नव वर्ष फल श्रवण (नए साल का भविष्यफल जानना)
  • तैल अभ्यंग (तैल से स्नान)
  • निम्ब-पत्र प्राशन (नीम के पत्ते खाना)
  • ध्वजारोपण
  • चैत्र नवरात्रि का आरंभ
  • घटस्थापना

संकल्प के समय, चैत्र के महीने में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर नव वर्ष नामग्रहण(नए साल का नाम रखने की प्रथा) मनाया जा सकता है। इस संवत्सर का नाम आनंद है और वर्ष 2078 है। इसके अलावा, यह श्री शालिवाहन शक्समावत 1943 भी है और इस शक संवत का नाम प्लव है।

नव संवत्सर का राजा (वर्षेश)

नए साल के पहले दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी भी माना जाता है। हिंदू नव वर्ष 2021 में मंगलवार से शुरू हो रहा है, इसलिए नए संवत का स्वामी मंगल है।

गुड़ी पड़वा के पूजन-मंत्र

आगे दिए गए मंत्रों का जाप गुड़ी पड़वा पर पूजा के लिए किया जा सकता है। कुछ लोग इस दिन उपवास भी करते हैं।

प्रातः व्रत संकल्प

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे अमुकनामसंवत्सरे चैत्रशुक्ल प्रतिपदि अमुकवासरे अमुकगोत्रः अमुकनामाऽहं प्रारभमाणस्य नववर्षस्यास्य प्रथमदिवसे विश्वसृजः श्रीब्रह्मणः प्रसादाय व्रतं करिष्ये।

शोडषोपचार पूजा संकल्प

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे अमुकनामसंवत्सरे चैत्रशुक्ल प्रतिपदि अमुकवासरे अमुकगोत्रः अमुकनामाऽहं प्रारभमाणस्य नववर्षस्यास्य प्रथमदिवसे विश्वसृजो भगवतः श्रीब्रह्मणः षोडशोपचारैः पूजनं करिष्ये।

पूजा के बाद व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस मंत्र का जाप करना चाहिए–

ॐ चतुर्भिर्वदनैः वेदान् चतुरो भावयन् शुभान्।
ब्रह्मा मे जगतां स्रष्टा हृदये शाश्वतं वसेत्।।

गुड़ी पड़वा मनाने की विधि

  1. गुड़ी को सुबह स्नान आदि के बाद सजाया जाता है।
    - लोग घरों को साफ करते हैं गांवों में, घरों को गोबर से लीपा जाता है।
    - शास्त्रों के अनुसार, इस दिन अरुणोदय के समय अभ्यंग स्नान करना चाहिए।
    - सूर्योदय के तुरंत बाद, गुड़ी की पूजा की जाती है। इसमें ज्यादा देरी नहीं की जानी चाहिए।
  2. चमकीले रंगों से सुन्दर रंगोली बनाई जाती है और ताज़े फूलों से घर को सजाते हैं।
  3. लोग नए और सुंदर कपड़े पहनकर तैयार होते हैं। आमतौर पर मराठी महिलाएं इस दिन नौवारी (9 गज लंबी साड़ी) पहनती हैं और पुरुष कुर्ता-पायजामा या धोती-कुर्ता केसरिया या लाल पगड़ी के साथ पहनते हैं।
  4. परिवार के सदस्य इस त्योहार को इकट्ठा हो कर मनाते हैं और एक-दूसरे को नव संवत्सर की बधाई देते हैं।
  5. इस दिन, नए साल का भविष्यफल सुनने-सुनाने की भी प्रथा है।
  6. पारंपरिक रूप से इस त्योहार की शुरुआत मीठे नीम के पत्तों को प्रसाद के रूप में खाने से होती है। आमतौर पर इस दिन मीठे नीम के पत्ते, गुड़ और इमली की चटनी बनाई जाती है। मान्यता है कि यह खून साफ करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसका स्वाद यह भी दर्शाता है कि जीवन चटनी की तरह खट्टा और मीठा होता है।
  7. गुड़ी पड़वा में श्रीखंड, पूरन पोली, खीर आदि पकवान बनाये जाते' है।
  8. शाम को, लोग लेज़िम नामक एक पारंपरिक नृत्य भी करते हैं।

गुड़ी कैसे लगाएँ

  1. जिस स्थान पर गुड़ी लगाई जानी है उसे अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए।
  2. स्थान को पवित्र बनाने के लिए सबसे पहले स्वस्तिक चिन्ह बनाएं।
  3. स्वस्तिक के मध्य में हल्दी और कुमकुम अर्पित करें।

विभिन्न स्थलों में गुड़ी पड़वा आयोजन

यह त्यौहार देश में विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

  1. गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय इसे संवत्सर पड़वो नाम से मनाता है।
  2. कर्नाटक में, इस त्योहार को युगादी के नाम से जाना जाता है।
  3. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में गुड़ी पड़वा को उगाड़ी नाम से मनाते हैं।
  4. कश्मीरी हिंदू इस दिन को नवरेह के रूप में मनाते हैं।
  5. मणिपुर में इस दिन को साजिबू नोंग्मा पानबा या मेइतेई चेइराओबा कहा जाता है।
  6. इसी दिन, चैत्र नवरात्रि भी शुरू होती है।

इस दिन लोग महाराष्ट्र में गुड़ी लगाते हैं, इसलिए इस त्योहार को गुड़ी पड़वा कहा जाता है। एक बाँस लेकर उसके ऊपर चांदी, तांबे या पीतल का उलटा कलश रखा जाता है और उसे सुन्दर कपड़े से सजाया जाता है। आमतौर पर यह कपड़ा केसरिया रंग और रेशम का होता है। उसके बाद गुड़ी को गाठी, नीम के पत्तों, आम के डंठल और लाल फूलों से सजाया जाता है।

गुड़ी को ऊंचे स्थान जैसे की घर की छत पर रखा जाता है, ताकि उसे दूर से देखा जा सके। कई लोग इसे घर के मुख्य दरवाजे या खिड़कियों पर भी लगाते हैं।

गुड़ी का महत्व

गुड़ी पड़वा से कई बातें जुड़ी हुई हैं। आइए हम उनमें से कुछ को देखते हैं -

  1. सम्राट शालिवाहन द्वारा शकों को हराने की ख़ुशी में लोगों ने घरों पर गुड़ी को लगाया था।
  2. कुछ लोग छत्रपति शिवाजी की जीत को याद करने के लिए गुड़ी का भी उपयोग करते हैं।
  3. यह भी माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने इसी दिन ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए गुड़ी को ब्रह्मध्वज भी माना जाता है। इसे इंद्रध्वज के नाम से भी जाना जाता है।
  4. कुछ लोग भगवान राम की 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या वापस आने की याद में गुड़ी पड़वा का त्योहार मनाते हैं।
  5. ऐसा माना जाता है कि गुड़ी लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
  6. गुड़ी को धर्म-ध्वज भी कहा जाता है; तो इसके प्रत्येक भाग का अपना विशिष्ट अर्थ है - उल्टा चरित्र सिर का प्रतिनिधित्व करता है जबकि दण्ड रीढ़ की हड्डी का दर्शाता करता है।
  7. किसान रबी की फसल की कटाई के बाद फिर से बुवाई की खुशी में इस त्योहार को मनाते हैं। अच्छी फसल की कामना के लिए वे इस दिन खेतों की जुताई भी करते हैं।
  8. हिंदुओं में पूरे वर्ष के दौरान साढ़े तीन मुहूर्त बहुत शुभ माने जाते हैं। ये साढ़े तीन मुहूर्त हैं - गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, दशहरा और दिवाली को आधा मुहूर्त माना जाता है।

2021 में गुड़ी पड़वा कब है?

गुडी पडवा 2021 मुहूर्त

मंगलवार, 13 अप्रैल, 2021

मराठी विक्रम संवत 2078 शुरू

अप्रैल 12, 2021 को 08:02:25 से प्रतिपदा आरम्भ

अप्रैल 13, 2021 को 10:18:32 पर प्रतिपदा समाप्त