मासिक शिवरात्रि


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मासिक शिवरात्रि व्रत तिथि 2021 हिंदी में (Monthly Shivaratri fast date 2021 in hindi)

दिनांक त्यौहार
सोमवार, 11 जनवरी मासिक शिवरात्रि
बुधवार, 10 फरवरी मासिक शिवरात्रि
गुरुवार, 11 मार्च मासिक शिवरात्रि
शनिवार, 10 अप्रैल मासिक शिवरात्रि
रविवार, 09 मई मासिक शिवरात्रि
मंगलवार, 08 जून मासिक शिवरात्रि
गुरुवार, 08 जुलाई मासिक शिवरात्रि
शुक्रवार, 06 अगस्त मासिक शिवरात्रि
रविवार, 05 सितंबर मासिक शिवरात्रि
सोमवार, 04 अक्टूबर मासिक शिवरात्रि
बुधवार, 03 नवंबर मासिक शिवरात्रि
गुरुवार, 02 दिसंबर मासिक शिवरात्रि

इस लेख में आप पाएंगे हर माह आने वाले प्रभु शिव जी को समर्पित मासिक शिवरात्रि के उपवास की तिथियां साल 2021 के लिए। मासिक शिवरात्रि 2021 की तिथियों की सूची के माध्यम से आप इस त्यौहार की न केवल तिथि जान पाएंगे, और साथ ही पूरे विधि-विधान का ज्ञान भी प्राप्त कर पाएंगे।

हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का विशेष रूप से महत्व है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मासिक शिवरात्रि साल के हर महीने में और महाशिवरात्रि साल में एक बार मनाई जाती है। ग्रंथों में ऐसा कहा गया है कि इस दिन उपवास करने से व्यक्ति का प्रत्येक मुश्किल कार्य आसान हो जाता है। मासिक पर्वों में शिवरात्रि का व्रत और पूजा करने का बहुत बड़ा महत्व होता है।

मासिक शिवरात्रि कब है?

शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक त्यौहार है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन को मासिक शिवरात्रि मनाते है। यह त्यौहार न केवल व्रती को अपनी इंद्रियों को अपने नियंत्रण में करने में सहायता करता है, बल्कि उसे ईर्ष्या, लालच, क्रोध और अभिमान जैसी भावनाओं को रोकने में भी सहायता करता है। मासिक शिवरात्रि प्रत्येक महीने मनाई जाती है। ग्रंथों के अनुसार साप्ताहिक पर्वों में प्रभु शिव जी को सोमवार का दिन समर्पित किया गया है।

वैसे तो वर्ष में एक बार मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसके अलावा भी कई साल में हर महीने शिवरात्रियाँ आती हैं जिन्हें हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि अमांत पंचांग के अनुसार माघ माह में आने वाली मासिक शिवरात्रि को कहा जाता है। लेकिन पूर्णिमांत पंचांग के मुताबिक फाल्गुन मास की मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की मान्यता प्राप्त है।

हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है। जहाँ शिव के भक्त वर्ष में एक बार बड़ी ही धूमधाम से महाशिवरात्रि मनाते हैं वहीं भगवान शंकर जी की पूजा करने में हर माह के एक मासिक शिवरात्रि मनाने की भी रीती-रिवाज हैं। शिवरात्रि हिन्दुओं के मुख्य पर्वों में से एक है जिसे न केवल 1 या 2 क्षेत्र के मनुष्य मनाते हैं बल्कि पूरे विश्व भर में बड़ी ही धूम-धाम से मनाई जाती है।

मासिक शिवरात्रि का महत्व

शिवरात्रि के उपवास की महिमा से तो सभी भली-भांति परिचित हैं, लेकिन प्रत्येक माह में आने वाली मासिक शिवरात्रि का उपवास भी बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि में उपवास, व्रत रखने और प्रभु भोलेनाथ जी की सच्चे मन से पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इस दिन उपवास करने से हर मुश्किल काम आसान हो जाता है और जातक की सारी परेशानियां भी दूर जाती हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन की महिमा के बारे में यह भी कहा जाता है कि वो कन्याएं जो मन चाहा पति पाना चाहती हैं इस उपवास को करने के पश्चात उन्हें उनकी इच्छानुसार पति प्राप्त होता है और उनकी शादी में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। शिव पुराण के मुताबिक जो भी सच्चे मन से महा शिवरात्रि को करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

मासिक शिवरात्रि व्रत विधि

प्रत्येक महीने में आने वाले इस त्यौहार को हर वर्ग के हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। हममें से कई व्यक्ति मासिक शिवरात्रि का उपवास भी रखते हैं। वो श्रद्धालु जो मासिक शिवरात्रि करने की इच्छा रखते हैं उन्हें मासिक शिवरात्रि की शुरुआत महाशिवरात्रि के दिन से करनी चाहिए। इस उपवास को नर और नारी दोनों कर सकते है। भक्तों को शिवरात्रि की रात्रि को जाग कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। तो आइये जानते हैं मासिक शिवरात्रि पूजा नियम के बारे में विस्तार से–

  • मासिक शिवरात्रि के दिन आप सूर्य निकलने से पहले उठकर नहा ले।
  • अब आप किसी मंदिर में जा कर प्रभु शिव जी और उनके परिवार (माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिक जी, नंदी जी) की आराधना करें।
  • सर्वप्रथम आप शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, दूध, चीनी, शुद्ध घी, दही, शहद आदि से करें। ऐसी मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर जी अधिक खुश हो जाते हैं।
  • अब आप शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं। ध्यान रहे कि बेलपत्र अच्छी तरह स्वच्छ होने चाहिए।
  • अब आप प्रभु शंकर जी की धूप, दीप, फल और पुष्प आदि से पूजा-अर्चना करें।
  • भगवान शिव जी की पूजा करते समय आपको शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करना चाहिए।
  • शाम के समय आप फल का सेवन कर सकते हैं। व्रती को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • अगले दिन प्रभु शिव जी की पूजा-अर्चना करें और दान आदि करने के बाद अपना व्रत खोलें।

इस बात का ध्यान रखें कि उपवास और उसका उद्यापन विधिवत तरीके से किया जाना चाहिए। शिवरात्रि की पूजा करने का समय मध्य रात्रि को होता है। प्रभु शिव जी की पूजा रात्रि के 12 बजे के पश्चात करें और पूजा करते समय श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी करें। ऐसा करने से व्रती की आर्थिक समस्याए दूर होती हैं। यदि कोई भी सच्चे मन और पूरी श्रध्दा से ईश्वर की आराधना करें और उनका जाप करे| तो उस व्यक्ति को मन चाहा फल जरुर प्राप्त होगा। आपको बता दें कि इस दिन सफेद कपड़ो का दान करने की अधिक प्रतिष्ठा होती है, जिससे आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी। यह भी कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव जी और माता पार्वती जी की पूजा करने से व्यक्ति की हर तरह के कर्जों से छुटकारा मिलता है।

मासिक शिवरात्रि व्रत कथा

जिस तरह प्रत्येक उपवास आदि के पीछे कई कथाएं होती है वैसे ही मासिक शिवरात्रि करने के पीछे भी एक कथा है। आइये जानते हैं मासिक शिवरात्रि व्रत कथा के बारे में–

पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक प्रभु शिव जी महाशिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि के समय शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। जिसके बाद सर्वप्रथम प्रभु ब्रह्मा और प्रभु विष्णु ने उनकी आराधना की थी। उस दिन से लेकर आज तक इस दिन को प्रभु शिव जी के जन्म दिन के रूप में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव जी की पूजा करने का विशेष महत्व है। बहुत से पुराणों में भी शिवरात्रि व्रत का उल्लेख किया गया है। ग्रंथों के मुताबिक अपने जीवन के उद्धार के लिए माँ लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, सीता, पार्वती और रति जैसी बहुत-सी देवियों और रानियों ने भी शिवरात्रि का उपवास किया था।

मासिक शिवरात्रि जीवन में सुख और शांति प्रदान करती है और प्रभु शिव जी की कृपा दृष्टि से व्रती के सारे बिगड़े कार्य बन जाते है। यह उपवास पुत्र प्राप्ति, रोगों से मुक्ति के लिए भी किया जाता है।